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छुई मिट्टी खदान धंसने से एक महिला की मौत, एक घायल — दो महिलाओं की जान बची

अंबिकापुर

बलरामपुर जिले के ककनेसा गांव में शुक्रवार सुबह हादसा हो गया। छुई मिट्टी निकालने के दौरान खदान धंसने से दो महिलाएं मिट्टी में दब गईं, जिसमें एक महिला की मौत हो गई, जबकि दूसरी घायल हो गई। हादसे के वक्त मौके पर मौजूद दो अन्य महिलाएं सुरक्षित बच गईं। घटना से गांव में कोहराम मच गया। महिलाओं को गांववालों ने ही बाहर निकाला।

जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह ग्राम गुरमुटी निवासी सविता बाई पति विजय कुमार (35) गांव की अन्य तीन महिलाओं के साथ छुई मिट्टी निकालने के लिए ग्राम ककनेसा गई थी। ककनेसा में छुई मिट्टी की खदान है, जहां से आसपास के गांवों के लोग बड़ी संख्या में मिट्टी निकालते हैं।

छुई मिट्टी निकालने के लिए बनाए गए सुरंग में सविता बाई और एक अन्य महिला घुसी हुई थीं, तभी अचानक सुरंग का ऊपरी हिस्सा धंस गया और दोनों महिलाएं मिट्टी में दब गईं।

साथ गई महिलाओं की चीख पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। एक महिला का कुछ हिस्सा मिट्टी से बाहर था, जिसे ग्रामीणों ने तत्काल निकाल लिया। वहीं अंदर दबी सविता बाई को निकालने के लिए ग्रामीणों ने फावड़ा से खुदाई शुरू की। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद सविता बाई को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

ग्रामीणों ने घायल महिला को वाड्रफनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है। वहीं, मृतका सविता बाई का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

छुई मिट्टी का उपयोग सरगुजा अंचल में ग्रामीण क्षेत्रों में दीवारों और घरों की लिपाई-पोताई के लिए किया जाता है। यह सफेद और चिकनी मिट्टी है।

दीपावली त्योहार से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं घरों की रंगाई पोताई के लिए इस मिट्टी को निकालती हैं। इस मिट्टी को निकालने में खतरा रहता है।

प्रतिवर्ष ऐसी घटनाएं होती हैं। ककनेसा में जहां यह हादसा हुआ, वहां खदान का ऊपरी हिस्सा भारी था, जो अचानक धंस गया और हादसा हो गया।

घटना की सूचना मिलने पर वाड्रफनगर तहसीलदार अनुराग केरकेट्टा भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने असुरक्षित तरीके से छुई मिट्टी निकालने पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश पंचायत प्रतिनिधियों को दिए।

प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि सुरक्षा उपायों के बिना खदानों में प्रवेश न करें और छुई मिट्टी निकालने के कार्य में सावधानी बरतें।

Yogesh Bansal

Editor in Chief

Yogesh Bansal

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