छत्तीसगढ़

पार्षद की कथित दखलंदाजी से आंगनबाड़ी सहायिका ढाई साल से नदारद!

 

-केंद्र क्रमांक 143 की कार्यकर्ता अकेले संभाल रही जिम्मेदारी, विभागीय कार्रवाई पर उठे सवाल

**बिलासपुर।** शहरी क्षेत्र के कतियापारा सेक्टर अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 143 की सहायिका के करीब ढाई वर्षों से नियमित रूप से केंद्र से अनुपस्थित रहने का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्थानीय पार्षद रंगा नादम की कथित दखलंदाजी के चलते विभागीय स्तर पर कार्रवाई प्रभावित हो रही है। मामले को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

• 16 वर्षों से सेवा के बाद विवाद ने लिया तूल

जानकारी के अनुसार, केंद्र क्रमांक 143 में पदस्थ सहायिका करीब 16 वर्षों से कार्यरत रही है। बताया जा रहा है कि समीपस्थ एक अन्य आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका का पद रिक्त होने के कारण केंद्र क्रमांक 143 की सहायिका को वहां कार्य कराने को लेकर विवाद की स्थिति बनी। इसी दौरान केंद्र की कार्यकर्ता और सहायिका के बीच मतभेद बढ़ने की बात सामने आई।

आरोप है कि इसके बाद सहायिका ने अपने मूल केंद्र पर नियमित रूप से उपस्थित होना बंद कर दिया। केंद्र की कार्यकर्ता द्वारा इसकी सूचना संबंधित सुपरवाइजर और परियोजना अधिकारी को दिए जाने के बावजूद करीब ढाई वर्षों से स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

• विभागीय अधिकारियों को शिकायत, फिर भी कार्रवाई का इंतजार

मामले में यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि सहायिका की लगातार अनुपस्थिति के बावजूद उसे अन्य आंगनबाड़ी केंद्र में संबद्ध दर्शाकर वेतन भुगतान का लाभ दिया जा रहा है। यदि यह तथ्य सही है तो विभागीय नियमों के तहत इसकी जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग उठ रही है।

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जब भी सहायिका के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की स्थिति बनती है, तब उसका परिवार कथित रूप से पार्षद के माध्यम से अधिकारियों पर दबाव बनाने का प्रयास करता है।

• ढाई साल से बिना सहायिका के केंद्र चला रही कार्यकर्ता

सहायिका की अनुपस्थिति का सीधा असर आंगनबाड़ी केंद्र के संचालन पर पड़ रहा है। केंद्र क्रमांक 143 की कार्यकर्ता पिछले करीब ढाई वर्षों से अकेले ही केंद्र की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। बच्चों की देखरेख से लेकर केंद्र की अन्य गतिविधियों तक का दायित्व एक ही कर्मचारी पर होने से कार्यभार बढ़ने की बात कही जा रही है।

• विभाग की भूमिका पर उठ रहे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सहायिका वास्तव में लंबे समय से अपने मूल केंद्र पर अनुपस्थित है, तो विभागीय अधिकारियों द्वारा अब तक उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं की गई। वहीं, यदि उसे विभागीय आदेश के तहत किसी अन्य केंद्र में संबद्ध किया गया है, तो उस आदेश और उसकी वैधता को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने महिला एवं बाल विकास विभाग से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, सहायिका की उपस्थिति एवं वेतन भुगतान का रिकॉर्ड जांचने तथा यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

**अब देखना होगा कि विभाग इस पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करता है या लंबे समय से चल रहा यह विवाद यूं ही फाइलों में दबा रहता है।**

Shreyansh baid

Editor in Chief

Shreyansh baid

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