सेवा संकल्प अभियान 2026 : बस पहुंची तो गांवों में लौटी नई उम्मीद, मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से दूरस्थ अंचलों में आसान हुई जिंदगी की राह, 850 गांव पहली बार नियमित बस सेवा से जुड़े….

रायपुर: गांव की सड़क पर दूर से आती बस और उसके हॉर्न की आवाज…। बच्चे उत्साह से हाथ हिलाते हैं, ग्रामीणों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। जिन गांवों के लोगों के लिए कभी बस का आना ही बड़ी बात थी, वहां आज नियमित बस सेवा उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रही है। यह बदलाव केवल आवागमन आसान होने का नहीं है, बल्कि दूरस्थ गांवों के शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, रोजगार और प्रशासनिक केंद्रों से जुड़ने का है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर शुरू हुई मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने अपने पहले वर्ष में प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 04 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर से शुरू हुई इस योजना के प्रथम चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग को शामिल किया गया। आज 13 जिलों के 106 चयनित मार्गों पर 107 बसें संचालित हो रही हैं और 850 ऐसे नए गांवों तक पहली बार नियमित यात्री बस सेवा पहुंची है, जहां पहले यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

24 लाख किलोमीटर का सफर, हजारों ग्रामीणों की राह हुई आसान
योजना के अंतर्गत संचालित 107 बसों ने एक वर्ष में लगभग 24 लाख किलोमीटर की दूरी तय की है। ये बसें प्रतिदिन करीब 17,500 किलोमीटर का सफर कर रही हैं। इन आंकड़ों के पीछे उन ग्रामीण परिवारों की बदलती जिंदगी है, जिन्हें कभी हाट-बाजार, अस्पताल, स्कूल, तहसील, ब्लॉक या जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए पैदल चलना पड़ता था अथवा निजी और वैकल्पिक वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता था।
नियमित बस सेवा मिलने से अब विद्यार्थी समय पर विद्यालय पहुंच पा रहे हैं। ग्रामीणों के लिए अस्पताल और बाजार तक जाना आसान हुआ है। शासकीय कार्यों के लिए ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय तक पहुंचने में भी सुविधा हुई है। इस तरह बस गांव और शहर के बीच केवल दूरी ही कम नहीं कर रही, बल्कि आवश्यक सेवाओं और अवसरों तक पहुंच को भी आसान बना रही है।
जशपुर की पहाड़ियों में बदलाव की कहानी
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का असर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। जिले में 16 चयनित मार्गों पर 16 बसों का संचालन किया जा रहा है। ऐसे अनेक गांव अब नियमित सार्वजनिक परिवहन से जुड़ रहे हैं, जहां लोगों को पहले आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

बगीचा विकासखंड के सन्ना निवासी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सुनीता निकुंज इस बदलाव को अपने रोजमर्रा के जीवन में महसूस कर रही हैं। पहले उन्हें पास के गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचने के लिए किसी से लिफ्ट मांगनी पड़ती थी। कई बार निजी वाहन का सहारा लेना पड़ता था और वाहन नहीं मिलने पर पैदल भी जाना पड़ता था। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यह सफर और कठिन हो जाता था।
अब ग्रामीण बस सेवा शुरू होने के बाद उनकी राह आसान हुई है। श्रीमती सुनीता कहती हैं, “यह बस मेरे लिए बहुत बढ़िया साधन बन गई है।” उनकी यह छोटी-सी बात बताती है कि दूरस्थ अंचलों में सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता कामकाजी महिलाओं के जीवन में कितना बड़ा बदलाव ला सकती है।
पहले पैदल जाते थे, अब समय पर लौट आते हैं
ग्राम मरंगी निवासी श्री दशरथ भगत भी उन ग्रामीणों में शामिल हैं, जिनकी दिनचर्या बस सेवा शुरू होने से आसान हुई है। वे बताते हैं कि पहले इस सड़क पर बस नहीं चलती थी। आवश्यक कार्य से बाहर जाने के लिए कई बार पैदल सफर करना पड़ता था। अब बस शुरू होने से बगीचा तक आना-जाना सहज हो गया है।
श्री भगत कहते हैं, “अब मुख्यमंत्री जी की पहल से बस शुरू हो गई है। हम आसानी से बगीचा जाते हैं और समय पर वापस भी लौट आते हैं।”
इसी तरह यात्री श्री मंगलराम बताते हैं कि पहले उन्हें छिछली और चंपा जैसे बाजारों तक पैदल जाना पड़ता था। अब बस मिलने से सफर की परेशानी काफी कम हुई है। वे कहते हैं, “अब बस आने से बहुत सुविधा हो गई है। हम सब बहुत खुश हैं।”
ग्रामीणों के ये अनुभव बताते हैं कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का महत्व केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने की सुविधा में नहीं है। यह लोगों का समय बचा रही है और उन्हें अपनी दैनिक जरूरतों के लिए बेहतर परिवहन विकल्प उपलब्ध करा रही है।
सुकमा-बीजापुर के अंदरूनी इलाकों तक भी पहुंची बस
योजना की खासियत यह भी है कि बस सेवा का विस्तार प्रदेश के अत्यंत दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों तक किया गया है। सुकमा एवं बीजापुर जैसे अंदरूनी क्षेत्रों और नियद नेल्लानार के गांवों में भी ग्रामीण बसों का संचालन किया जा रहा है। सुकमा के गोलापल्ली, भेज्जी, किस्ताराम, मिनपा, चिंतलनार, बुरकापाल, चिंतागुफा, कोंटा, पुवर्ती और जगरगुंडा तथा बीजापुर के आवापल्ली, बासागुड़ा, सारकेगुड़ा, पामेड़, भैरमगढ़ और नेलासनार सहित अनेक दुर्गम क्षेत्रों को नियमित सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने की पहल की गई है।
इन क्षेत्रों में बस की पहुंच का अर्थ ग्रामीणों के लिए हाट-बाजार और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच का एक नियमित साधन उपलब्ध होना है। लंबे समय तक सीमित परिवहन सुविधाओं वाले इन अंचलों में नियमित बसों का संचालन गांवों को ब्लॉक एवं जिला मुख्यालयों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
दुर्गम रास्तों पर बस चलती रहे, सरकार दे रही वित्तीय सहायता
दूरस्थ और कम यात्री संख्या वाले ग्रामीण मार्गों पर नियमित बस संचालन को व्यावहारिक बनाने के लिए राज्य सरकार बस ऑपरेटरों को वित्तीय सहायता भी दे रही है। योजना में प्रथम वर्ष ₹26 प्रति किलोमीटर, द्वितीय वर्ष ₹24 प्रति किलोमीटर और तृतीय वर्ष ₹22 प्रति किलोमीटर की दर से सहायता का प्रावधान है। यह सहायता तीन वर्ष तक दी जाएगी। साथ ही अधिकतम तीन वर्ष तक मासिक मोटरयान कर में छूट का प्रावधान भी किया गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कम यात्री संख्या के कारण दूरस्थ ग्रामीण मार्गों पर बस सेवा प्रभावित न हो और लोगों को नियमित एवं निर्बाध सार्वजनिक परिवहन मिलता रहे।
तकनीक से निगरानी, मोबाइल पर बस की जानकारी
योजना को तकनीक से भी जोड़ा गया है। बसों की लाइव ट्रैकिंग, ट्रिप, रूट और स्टॉपेज की जानकारी के लिए पृथक डडळठल् पोर्टल विकसित किया गया है। टस्ज्क् (ळच्ै) के जरिए परिवहन विभाग के कंट्रोल एवं कमांड सेंटर से बसों की निगरानी की जा रही है। बस ऑपरेटरों को वित्तीय सहायता का भुगतान भी ऑनलाइन टस्ज्क् रिपोर्ट के आधार पर किया जा रहा है।
यात्रियों की सुविधा के लिए ‘बस संगवारी’ ऐप के माध्यम से बसों की समय-सारिणी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को केवल विस्तारित ही नहीं, बल्कि तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है।
बस के साथ गांव तक पहुंच रही विकास की नई राह
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के एक वर्ष की उपलब्धि को केवल बसों और किलोमीटर के आंकड़ों में नहीं देखा जा सकता। इसकी वास्तविक तस्वीर उस विद्यार्थी की सुविधा में दिखाई देती है, जो अब समय पर स्कूल पहुंच सकता है; उस महिला के अनुभव में दिखाई देती है, जिसे कार्यस्थल तक जाने के लिए अब लिफ्ट का इंतजार नहीं करना पड़ता; और उस ग्रामीण की मुस्कान में दिखाई देती है, जो हाट-बाजार या जरूरी काम पूरा कर उसी दिन आसानी से अपने गांव लौट सकता है।
850 गांवों का पहली बार नियमित बस सेवा से जुड़ना ग्रामीण कनेक्टिविटी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दूरस्थ अंचलों तक पहुंच रही ये बसें गांवों और शहरों के बीच की भौगोलिक दूरी के साथ सुविधाओं और अवसरों की दूरी भी कम कर रही हैं।
‘सेवा मेरा योगदान’ की भावना के साथ मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना दूरस्थ गांवों के लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़कर सेवा संकल्प को जमीन पर आकार दे रही है। गांव की सड़क पर दौड़ती हर बस के साथ आज एक नई सुविधा ही नहीं, बल्कि बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, आसान आवागमन और आगे बढ़ने की नई उम्मीद भी गांव तक पहुंच रही है।

